कोरोनिल: राजस्थान सरकार बाबा रामदेव पर करेगी केस, कहा- यह ट्रायल नही, फ्रॉड है.



कोरोना की दवा कोरोनिल बनाने का दावा करने वाले बाबा रामदेव पर राजस्थान सरकार केस दर्ज कराएगी. सरकार का कहना है कि बाबा रामदेव ने बिना परमिशन ट्रायल किया है. यह फ्रॉड है, न कि ट्रायल. मरीजों का रिजल्ट निम्स में तीन के अंदर नहीं आता है. जिन पर ट्रायल किया गया, वो असिम्टोमेटिक केस थे और उसी दिन वह निगेटिव हो जाते हैं.

दरअसल, बाबा रामदेव ने दावा किया था कि कोरोना की दवा कोरोनिल को पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (निम्स) यूनिवर्सिटी, जयपुर ने मिलकर तैयार किया है. कोरोनिल की लॉन्चिंग के मौके पर निम्स के चांसलर प्रोफेसर बलवीर सिंह तोमर भी मौजूद थे.

दरअसल, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से आयुष मंत्रालय को बताया गया कि ये क्लीनिकल ट्रायल जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च (निम्स) में किया गया था. दावा किया गया कि उन्होंने हर नियम का पालन किया है, साथ ही आयुर्वेदिक साइंस सेंट्रल काउंसिल के डीजी को लूप में रखा था.

कोरोनिल पर सवाल उठने के बाद आयुष मंत्रालय में पतंजलि की ओर से जो रिसर्च पेपर दाखिल किया गया है, उसके अनुसार कोरोनिल का क्लीनिकल टेस्ट 120 ऐसे मरीजों पर किया गया है, जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण काफी कम थे. इन मरीजों की उम्र 15 से 80 साल के बीच थी.

अब निम्स में ट्रायल की बात सामने आने के बाद राजस्थान सरकार हरकत में आ गई है और उसका कहना है कि पतंजलि ने कोई परमिशन नहीं ली थी. सरकार का दावा है कि निम्स में किसी भी मरीज की रिपोर्ट तीन दिन में नहीं आती है और जिन मरीजों पर ट्रायल किया गया, वह उसी दिन निगेटिव हो जाते हैं.

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