चीनी एप UC browser को टक्कर देने के लिए तीन बिहारी युवाओं ने बनाया 'मैगटैप', ये है खासियत.



पटना. चीन से झड़प और भारतीय जवानों के शहादत के बाद से ही भारत में एक बार फिर चीनी समान और ऐप्स के बहिष्कार करने की मांग उठने लगी है. ऐसे में बिहारी युवाओं द्वारा बनाया गया एक खास वेब ब्राउजर/ऐप चीनी ऐप्स को चुनैती दे रहा है. दरअसल बिहार के तीन युवाओं ने ‘मैगटैप’ (MagTapp) नामक वेब ब्राउज़र बनाया है जो इस केटेगरी के चाइनीज ऐप्स (यूसी ब्राउज़र) से कई मायनों में कहीं बेहतर साबित हो रहा है. इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘विजुअल डिक्शनरी’ है, जिससे बड़ी आसानी से किसी भी दूसरी भाषा के शब्द का अर्थ चित्र सहित अपनी भाषा में देखा-सुना जा सकता है.

10 लाख से अधिक यूजर

इसमें तीन चायनीज ऐप के अलग-अलग फीचर इस भारतीय ऐप के एक साथ मिल सकती है. ऐप के फाउंडर की माने तो गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्चिंग के कुछ दिनों में ही इसे 8 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और फिलहाल इसकी रेटिंग 4.5 है और इसके 10 लाख से ज्यादा यूजर हैं.

बिहारी सिर्फ सीमा पर नहीं टेक्नोलॉजी में भी दे रहे हैं चुनौती

इस ऐप से जुड़े सत्यपाल चंद्रा बताते हैं कि ‘मैगटैप’ पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ तो है ही, साथ में यह अपने तरह का दुनिया में पहला प्रयोग है. ‘मैगटैप’ एक ‘विजुअल ब्राउज़र’ के साथ-साथ डॉक्यूमेंट रीडर, ट्रांसलेशन और ई-लर्निंग की सुविधा देने वाला अनोखा ऐप है. इस ऐप को ख़ास तौर पर देश के हिंदीभाषी स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. वे कहते हैं कि इंटरनेट पर अधिकतर अच्छी जानकारिययां इंग्लिश में ही हैं. ऐसे में उन्हें पढ़ते वक़्त यह ऐप किसी भी शब्द, वाक्य या पूरे पैराग्राफ को भी हिंदी सहित देश की 12 भाषाओं में अनुवाद कर सकता है. साथ में कोई भी दूसरा ऐप जैसे- व्हाट्सऐप, फेसबुक, मैसेंजर आदि में भी किसी शब्द पर टैप कर उसका अर्थ जाना जा सकता है. लॉक डाउन के दौरान कई एक्स्ट्रा फीचर भी इस ऐप में जोड़े गए हैं. इस ऐप पर बच्चों से लेकर बैंक, रेलवे और यूपीएससी लेवल तक के कम्पटीशन एग्जाम की तैयारी करने लायक स्टडी मटेरियल टेक्स्ट और वीडियो फॉर्मेट में मुफ्त में उपलब्ध है

देश-विदेश की अलग-अलग भाषाओं में भी करेगा अनुवाद

‘मैगटैप’ को डेवलप करने वाले रोहन कुमार का कहना है कि उन्होंने अभी ही इसका अपडेटेड वर्जन ‘मैगटैप 2.0’ लांच किया है. इस नए अपडेट में कई और सुविधाएं जोड़ी गयी हैं, जिससे यह ऐप चीन की यूसी ब्राउज़र के साथ ही गूगल के क्रोम और ओपेरा ब्राउज़र से भी बेहतर साबित होगा. उन्होंने बताया कि ऐप का ट्रांसलेशन फीचर अब 12 भारतीय भाषाओँ के साथ फ्रेंच, जर्मन, इटालियन और अरबी समेत 29 विदेशी भाषाओं में भी पल भर में अनुवाद कर सकेगा. इससे भारत में हिंदी सहित कोई भी भाषा जानने वाले लोग अपने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की सभी मुख्य भाषाओं को घर बैठे सीख सकते हैं.

पीएम के आत्मनिर्भर सपने को साकार करता है ये ऐप

मैगटैप ऐप बनाने वाली कंपनी ‘मैगटैप टेक्नोलॉजी’ का मुख्यालय मुंबई में है. यह कंपनी भारत सरकार के स्टार्टअप योजना से भी जुडी है. कंपनी के तीनों फाउंडर, सत्यपाल चंद्रा, रोहन सिंह और अभिषेक बिहार के गया और समस्तीपुर के रहने वाले हैं. ‘मैगटैप’ को रोहन ने डिजाईन किया है और इसके टेक्निकल पक्षों को संभालने में उनके 18 वर्षीय भाई अभिषेक सिंह मदद करते हैं.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आते हैं सत्यपाल

नक्सल प्रभावित गया के इमामगंज प्रखंड के रहने वाले सत्यपाल चंद्रा अभाव और गरीबी के बीच प्रारंभिक पढाई पूरी कर कमाने के इरादे से वे दिल्ली चले गए. दिल्ली के ही एक रेस्टोरेंट में जब उन्हें इंग्लिश न जानने की वजह से वेटर द्वारा झिड़क दिया गया. इसके बाद सत्यपाल ने करीब छः माह दिनरात मेहनत कर अंग्रेजी बोलना-लिखना सीखा और एक के बाद एक कई अंग्रेजी उपन्यास लिख डाले. उनकी किताबें ‘द मोस्ट इलिजिबल बैचलर’ और ‘व्हेन हेवेन्स फॉल डाउन’ काफी चर्चित रही हैं. किताबें लिखने के बाद उन्होंने वेब सीरीज भी बनायीं और अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपना नाम कर रहे हैं.

समस्तीपुर के रोहन 19 साल में ही बन गए वेब डेवलपर

समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के निवासी और आर्मी पर्सन सूबेदार पवन सिंह के पुत्र रोहन सिंह ने 19 साल की उम्र में ही वेब डेवलपर के तौर पर बड़ा नाम किया है. 12वीं की पढ़ाई के दौरान वे सोशल मीडिया के माध्यम से उपन्यासकार के तौर पर चर्चित हो चुके सत्यपाल चंद्रा के संपर्क में आये. इसके बाद दोनों ने मिलकर काम करने की ठानी जिसके फलस्वरूप ‘मैगटैप’ का जन्म हुआ. दोनों का कहना है कि इस ऐप को बनाकर आज दोनों बहुत खुश हैं अगर भविष्य में सरकार इसे बड़े स्तर पर स्पोर्ट करती है तो देश को इसका लाभ जरूर मिलेगा.

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